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Wednesday, 5 January 2011

जीवन

ये जीवन कहाँ से कहाँ चला जाता है ||

कभी यूँ ही सन्नाटे में , दूर से कुछ आवाजें आती हैं
जैसे कानों में भर के , यादें ऐसे इठलाती हैं
नन्ही सी धूप किरण जैसे , दूर से एक खुशबू लेकर
मेरे घर में पर्दों से लुका छुपी खेलती ,
यूँ ही बिखर जाती है
कोई आहट , किसी बीते हुए पल की ,
कभी हसाती है , कभी रुलाती है ...
ये जीवन कहाँ से कहाँ चला जाता है ...||

Thursday, 19 March 2009

......

इस पार से तेरी सच्चाई कुछ और नज़र आती है 

कुछ बातों में तेरी एक कसर नज़र आती है

उस ओर से तू देखता है मुझको तो ये बता...

क्या मुझमे भी तू देखता है इतनी ही खता?


(to myself...when I was a child)

Bird Talk!

एक सुबह को मुर्गे ने उठके बांक लगाया
पास में आके मैना ने उसको ये समझाया
"मुर्गा भाई! बड़े श्रमी हो! पौ फटते उठ जाते हो...
सुबह सुबह फिर शोर मचाके सबको तुम्ही जागते हो"
मुर्गा बोला, " मैना रानी, ये है मेरा काम...!
Once upon a time तो मैं था everybody's alarm!!!"